भैया चुनाव आ रहा है। ( हमरी कलम से)

सुबह सुबह टेहलने निकले तो दिखा अजब नज़ारा, सदियों बाद साफ सुथरा दिखा हमें मुहल्ला हमारा। मिजाजे सड़क का था अजब सा चेहरा, हर चौराहे पे था पुलिस का पेहरा। कुछ एक रंग के झंडो से, सजा था शहेर हमारा, कोने में पड़ा कूडादान, मायूस खड़ा था बेचारा। रातों रात नई सड़क देख मन अचंभित … Continue reading भैया चुनाव आ रहा है। ( हमरी कलम से)