कहा नहीं जा सकता फिर भी किसमें शैतान समाया है। 

कहा नहीं जा सकता फिर भी किसमें शैतान समाया है। वो वस्त्र जो हमने पहना है, वो चरित्र जो उसने ओढां है, वो खाना जो हमने खाया है, वो हवा जिसमें जीवन समाया है, है किया बर्बाद वही सब, जिससे ये जीवन आया है, कहा नहीं जा सकता फिर भी किसमें शैतान समाया है। वो … Continue reading कहा नहीं जा सकता फिर भी किसमें शैतान समाया है।