बात बिगड़ जाएगी।( हमरी कलम से )

मेरी खामोशी को खामोशी ही समझना, कुछ और समझोगे तो बात बिगड़ जाएगी। बेवजह यू न करीब आना, गर हम करीब आऐ तो बात बिगड़ जाएगी। अपनी हसरतों को यूं न दबा के रखना हमसे उमिद रखोगे तो बात बिगड़ जाएगी। और, मेरी नज़रों को समझ लेने का फन अभी तुम्मे नहीं, इशारों को समझने … Continue reading बात बिगड़ जाएगी।( हमरी कलम से )